Thursday, June 18, 2009


अभी एक दिन खंडाला जाने का मौका मिला..... हम दो ही लोग थे जाने वाले...सफ़र की शुरुआत पुणे की लोकल ट्रेन से हुई..कार्ला की गुफाये देखने गए......गुफ़ायें एक पहाड़ी को काट के बनाई गयीं हैं...नीचे कि तसवीर, पारम्परिक "बुलबुल सितार" पर गाते हुऐ एक लोक गायक कि है......