Friday, May 15, 2009

इस मन को लुभाये जाती हैं..........

...वो नीम का पेड़,
और बचपन कि यादें,
आज फ़िर से ना जाने क्यों,
इस मन को लुभाये जाती हैं,


नीम और उसके सफ़ेद फ़ूल,
मिट्टी कि खुशबू,
छत पर भरी दुपहरी का जोर,
उस पर हाथ मैं पतंग कि डोर,
इस मन को लुभाये जाती हैं,


वो तितली कांटों के पर क्यों,
पीले फ़ूल इतने पीले कैसे,
बारिश इतनी मीठी क्यों,
ये सवाल अब क्यों नहीं होते,


...वो नीम का पेड़,
और बचपन कि यादें...


(c)तुम्हारे मन की...जो मैने कही...